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Saturday, November 18, 2023

                                                                             
 हे री मैं तो प्रेम-दिवानी
मेरो दरद न जाणै कोय।
 दरद की मारी बन बन डोलूं
 बैद मिल्यो नही कोई॥


 ना मैं जानू आरती वन्दन,
 ना पूजा की रीत।
 लिए री मैंने दो नैनो के
दीपक लिए संजोये॥

 घायल की गति घायल जाणै,
जो कोई घायल होय।
 जौहरि की गति जौहरी जाणै
 की जिन जौहर होय॥


 सूली ऊपर सेज हमारी,
सोवण किस बिध होय।
 गगन मंडल पर सेज पिया की,
मिलणा किस बिध होय॥

 दरद की मारी बन-बन डोलूं
बैद मिल्या नहिं कोय।
 मीरा की प्रभु पीर मिटेगी
 जद बैद सांवरिया होय॥

                                
                                                                               
 बरसै बदरिया सावन की,
 सावन की मनभावन की ।

 सावन में उमग्यो मेरो मनवा,
 भनक सुनी हरि आवन की ॥

 उमड घुमड चहुं दिस से आयो,
 दामण दमके झर लावन की ।

 नान्हीं नान्हीं बूंदन मेहा बरसै,
 सीतल पवन सुहावन की ॥

 मीरा के प्रभु गिरघर नागर,
 आनन्द मंगल गावन की ॥

                                 
                                                                               
 मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई

 जाके सिर है मोरपखा मेरो पति सोई।
 तात मात भ्रात बंधु आपनो न कोई॥

 छांड़ि दई कुलकी कानि कहा करिहै कोई॥
 संतन ढिग बैठि बैठि लोकलाज खोई॥

 चुनरीके किये टूक ओढ़ लीन्हीं लोई।
 मोती मूंगे उतार बनमाला पोई॥

 अंसुवन जल सींचि-सींचि प्रेम-बेलि बोई।
 अब तो बेल फैल गई आणंद फल होई॥

 दूध की मथनियां बड़े प्रेम से बिलोई।
 माखन जब काढ़ि लियो छाछ पिये कोई॥

 भगति देखि राजी हुई जगत देखि रोई।
 दासी मीरा लाल गिरधर तारो अब मोही॥  

                               
                                                                                 
   मैं तो सांवरे के रंग राची।
 साजि सिंगार बांधि पग घुंघरू,
लोक-लाज तजि नाची।।

 गई कुमति, लई साधुकी संगति,
 भगत, रूप भै सांची।

 गाय गाय हरिके गुण निस दिन,
कालब्यालसूँ बांची।।

 उण बिन सब जग खारो लागत,
और बात सब कांची।
 मीरा श्रीगिरधरन लालसूँ,
भगति रसीली जांची।।   
                           
                                                                                
पग घूँघरू बाँध मीरा नाची रे।
 मैं तो मेरे नारायण की
आपहि हो गई दासी रे।
 लोग कहै मीरा भई बावरी
न्यात कहै कुलनासी रे॥

 विष का प्याला राणाजी
भेज्या पीवत मीरा हाँसी रे।
 'मीरा' के प्रभु गिरिधर नागर
 सहज मिले अविनासी रे॥
                                

                                                                             
  नटवर नागर नन्दा,
 भजो रे मन गोविन्दा,
 श्याम सुन्दर मुख चन्दा,
 भजो रे मन गोविन्दा।

 तू ही नटवर,
 तू ही नागर
, तू ही बाल मुकुन्दा ,
 सब देवन में कृष्ण बड़े हैं,
 ज्यूं तारा बिच चंदा।

 सब सखियन में
राधा जी बड़ी हैं,
 ज्यूं नदियन बिच गंगा,
 ध्रुव तारे, प्रहलाद उबारे,
 नरसिंह रूप धरता।

 कालीदह में नाग ज्यों नाथो,
 फण-फण निरत करता ;
 वृन्दावन में रास रचायो,
 नाचत बाल मुकुन्दा।

 मीरा के प्रभु गिरधर नागर,
 काटो जम का फंदा।।  
                               
                                                                            
तुम बिन मेरी कौन खबर ले,
 गोवर्धन गिरिधारीरे॥टेक॥

 मोर मुगुट पीतांबर सोभे।
 कुंडलकी छबी न्यारीरे॥१॥

 भरी सभामों द्रौपदी ठारी।
 राखो लाज हमारी रे॥२॥

 मीराके प्रभु गिरिधर नागर।
 चरनकमल बलहारीरे॥३॥
                               
                                                                                
जो तुम तोड़ो पियो मैं नही तोड़ूँ।
 तोरी प्रीत तोड़ी कृष्ण कोन संग जोड़ूँ ॥

 तुम भये तरुवर मैं भई पखिया।
 तुम भये सरोवर मैं तोरी मछिया॥

 तुम भये गिरिवर मैं भई चारा।
 तुम भये चंद्रा हम भये चकोरा॥

 तुम भये मोती प्रभु हम भये धागा।
 तुम भये सोना हम भये स्वागा॥

 बाई मीरा कहे प्रभु ब्रजके बाशी।
 तुम मेरे ठाकोर मैं तेरी दासी॥
                              
                                                                            
चालो मन गंगा जमुना तीर।
 गंगा जमुना निरमल पाणी
सीतल होत सरीर।

 बंसी बजावत गावत कान्हो,
 संग लियो बलबीर॥

 मोर मुगट पीताम्बर सोहे
 कुण्डल झलकत हीर।

 मीराके प्रभु गिरधर नागर
चरण कंवल पर सीर॥  
                               
                                                                                  
गली तो चारों बंद हुई,
मैं हरि से मिलूं कैसे जाय।
 ऊंची नीची राह लपटीली,
 पांव नहीं ठहराय।

 सोच सोच पग धरूं जतनसे,
बार बार डिग जाय॥
 ऊंचा नीचा महल पियाका
 म्हांसूं चढ़्‌यो न जाय।

 पिया दूर पंथ म्हारो झीणो,
 सुरत झकोला खाय॥
 कोस कोस पर पहरा बैठ्या,
पैंड़ पैंड़ बटमार।

 है बिधना, कैसी रच दीनी दूर
बसायो म्हांरो गांव॥
 मीरा के प्रभु गिरधर नागर
 सतगुरु दई बताय।

 जुगन जुगन से बिछड़ी
 मीरा घर में लीनी लाय॥
                               
                                                                                
कोई कछु कहो रे रंग लाग्यो,
 रंग लाग्यो भ्रम भाग्यो ।।टेक।।

 लोक कहैं मीराँ भई बाबरी
 भ्रम दूनी ने खाग्यो।

 कोई कहै रंग लाग्यो।
 मीराँ साधाँ में यूँ रम बैठी,
 ज्यूँ गुदड़ी में तागो।

 सोने में सुहागो।
 मीराँ लूती अपने भवन में,
सतगुरू आप जगाग्यो।
 ज्ञानी गुरू आप जगाग्यो।।
                                 

Wednesday, August 30, 2023


छम छम नाचे देखो वीर हनुमाना
छम छम नाचे देखो वीर हनुमाना
कहते लोग इसे राम का दिवाना
छम छम नाचे देखो वीर हनुमाना

पाँव में घूंघरु बांध के नाचे
राम जी का नाम इसे प्यारा लागे
राम ने भी देखो इसे खुब पहचाना
छम छम नाचे देखो वीर हनुमना

जहाँ जहाँ कीर्तन होता श्रीराम का
लगता हैं पहरा वहाँ वीर हनुमान का
राम के चरण में हैं इनका ठिकाना
छम छम नाचे देखो वीर हनुमना ॥

नाच नाच देखो श्रीराम को रिझाये
बनवारी देखो नाचता ही जाये
भक्तों में भक्त बडा दुनियाँ ने माना
छम छम नाचे देखो वीर हनुमना ॥

छम छम नाचे देखो वीर हनुमाना
कहते लोग इसे राम का दिवाना
छम छम नाचे देखो वीर हनुमाना

Tuesday, August 29, 2023

 दया करो ला जद आऊं मारा दाता ,

महर करो ला , जद आऊंला।

तू मेरा दाता मैं  तेरा मंगता ,

तेरा ही दास  कहाऊंगा। 

ए भूखा प्यासा की तोहे खबर है 

तू देगा में पाउँगा  

दया करो ला जद आऊं मारा दाता ,

महर करो ला , जद आऊंला।

गंगा नहीं नहाऊं जमना नहीं न्हाऊ ,

ओर  तीरथ  न जाऊं ला 

अड़ सठ  तीर्थ मारा गुरु चरणा  में 

यहीं बैठ कर न्हाऊ ला 

 दया करो ला  जद आऊं मारा दाता ,

महर करो ला , जद आऊंला।

 पान न तोडू पत्थर नहीं पूजूँ 

न कोई जीव  सातउ ला 

पात पात  में बसे निरञ्जन 

नित उठ दर्शन पाऊँ ला 

 दया करो ला  जद आऊं मारा दाता ,

महर करो ला , जद आऊंला। 

गगन मंडल में धूणी रामऊ 

सुखमण मांड मण्डाऊ ला 

पीवत पीवत मारी सुरतां जागी 

मतवालो  संत कहउँ ला 

 दया करो ला  जद आऊं मारा दाता ,

महर करो ला , जद आऊंला। 

 जोगी नहीं होऊ ,जटा न बढ़ाऊ ,

न कोई भस्म रमाऊँ ला 

मछन्दर प्रताप जति गौरख बोले 

जोट में जोट मिलाउ ला 

दया करो ला  जद आऊं मारा दाता ,

महर करो ला , जद आऊंला। 

ए भूखा प्यासा की तोहे खबर है 

तू देगा में पाउँगा 


 मोहन आओ तो सही गिरधर आओ तो सही 

माधव रे मंदिर में मीरा बाई ऐकली खड़ी

थे केहवो तो सांवरा मैं मोर मुकुट बन जाऊं

पेहरण लागे साँवरों रे, मस्तक पर राम जाऊं, वारे 

मोहन आओ तो सही गिरधर आओ तो सही 

माधव रे मंदिर में मीरा बाई ऐकली खड़ी

थे केहवो तो सांवरा मैं काजलियो बन जाऊं 

नैन लगावे साँवरों रे, नैना में रम जाऊं, वारे 

मोहन आओ तो सही गिरधर आओ तो सही 

माधव रे मंदिर में मीरा बाई ऐकली खड़ी

थे केहवो तो सांवरा मैं जल जमुना बन जाऊं 

न्हावन लागे साँवरों रे, अंग अंग रम जाऊं रे, म्हें तो 

मोहन आओ तो सही गिरधर आओ तो सही 

माधव रे मंदिर में मीरा बाई ऐकली खड़ी

थे केहवो तो सांवरा मैं पुष्प हार बन जाऊं 

कंठ में पहरे साँवरों रे, हिवड़ा पर रम जाऊं, म्हें तो 

मोहन आओ तो सही गिरधर आओ तो सही 

माधव रे मंदिर में मीरा बाई ऐकली खड़ी

थे केहवो तो सांवरा मैं पग पायल बन जाऊं 

नाचन लागे साँवरों रे, चरणा में रम जाऊं, म्हें तो 

मोहन आओ तो सही गिरधर आओ तो सही 

माधव रे मंदिर में मीरा बाई ऐकली खड़ी

 श्याम पिया मोरी रंग दे चुनरिया ।। टेर ।।

ऐसी वो रंग दे रंग नाई छूटे, 

धोबनिया धोये चाहे सारी उमरिया।

बिना रंगाये बाहर ना जाऊँ, 

चाहे तो बीत जाए सारी उमरिया।

लाल न ओढूँ पीली न ओढूँ, 

ओढूँगी श्याम तेरी काली कमलिया।

गागर जो भर दे, सिर पे जो धर दे, 

चलके बता दे श्याम तेरी नगरिया।

बाई मीरा कहे गिरधर नागर, 

हरि के चरण चित्त लागी रे लगनिया।

 स्याम! मने चाकर राखो जी

गिरधारी लाला! चाकर राखो जी।

चाकर रहसूं बाग लगासूं नित उठ दरसण पासूं।

ब्रिंदाबन की कुंजगलिन में तेरी लीला गासूं।।

चाकरी में दरसण पाऊँ सुमिरण पाऊँ खरची।

भाव भगति जागीरी पाऊँ, तीनूं बाता सरसी।।

मोर मुकुट पीताम्बर सोहै, गल बैजंती माला।

ब्रिंदाबन में धेनु चरावे मोहन मुरलीवाला।।

हरे हरे नित बाग लगाऊँ, बिच बिच राखूं क्यारी।

सांवरिया के दरसण पाऊँ, पहर कुसुम्मी सारी।

जोगी आया जोग करणकूं, तप करणे संन्यासी।

हरी भजनकूं साधू आया ब्रिंदाबन के बासी।।

मीरा के प्रभु गहिर गंभीरा सदा रहो जी धीरा।

आधी रात प्रभु दरसन दीन्हें, प्रेमनदी के तीरा।।

 सखी म्हांरो कानूडो कलेजे की कोर।।टेक।।

मोर मुगट पीताम्बर सोहै, कुण्डल की झकझोर।

बिन्द्रावन की कुँज गलिन में, नाचत नन्द किसोर।

मीराँ के प्रभु गिरधरनागर, चरण कँवल चितचोर।।

 राम मिलण के काज सखी, 

मेरे आरति उर में जागी री।

तड़पत-तड़पत कल न परत है,

 बिरहबाण उर लागी री।

निसदिन पंथ निहारूँ पिवको,

 पलक न पल भर लागी री।

पीव-पीव मैं रटूँ रात-दिन, 

दूजी सुध-बुध भागी री।

बिरह भुजंग मेरो डस्यो कलेजो, 

लहर हलाहल जागी री।

मेरी आरति मेटि गोसाईं, 

आय मिलौ मोहि सागी री।

मीरा ब्याकुल अति उकलाणी, 

पिया की उमंग अति लागी री

 राणाजी, म्हे तो गोविन्द का गुण गास्यां।

चरणामृत को नेम हमारे, नित उठ दरसण जास्यां॥

हरि मंदर में निरत करास्यां, घूंघरियां धमकास्यां।

राम नाम का झाझ चलास्यां भवसागर तर जास्यां॥

यह संसार बाड़ का कांटा ज्या संगत नहीं जास्यां।

मीरा कहै प्रभु गिरधर नागर निरख परख गुण गास्यां॥

 म्हांरो जणम जणम रो साथी, 

थाँने णा बिसार्यां दिन राती।।टेक।।

थां देख्यां बिण कल न पड़ताँ

 जामे म्हारी छाती।

ऊचां चढ़चढ़ पंथ निहार्यां 

कलप कलप अँडियां राती।

भी सागर जग बँधण झूंठां,

 झूंठा कुलार न्याती।

पल पल थारो रूप निहारां

 निरख निरखती मदमांती।

मीरां रे प्रभु गिरधरनागर, 

हरि चरणां चित रांती।।

 मोहि लागी लगन गुरुचरणन की।

चरण बिना कछुवै नाहिं भावै, जगमाया सब सपननकी॥

भौसागर सब सूख गयो है, फिकर नाहिं मोहि तरननकी।

मीरा के प्रभु गिरधर नागर आस वही गुरू सरननकी॥

 बसो मोरे नैनन में नंदलाल।

मोहनी मूरति सांवरि सूरति, नैणा बने बिसाल।

अधर सुधारस मुरली राजत, उर बैजंती-माल।।

छुद्र घंटिका कटि तट सोभित, नूपुर सबद रसाल।

मीरा प्रभु संतन सुखदाई, भगत बछल गोपाल।

 पायो जी म्हें तो राम रतन धन पायो।

वस्तु अमोलक दी म्हारे सतगुरू, किरपा कर अपनायो॥

जनम-जनम की पूँजी पाई, जग में सभी खोवायो।

खरच न खूटै चोर न लूटै, दिन-दिन बढ़त सवायो॥

सत की नाँव खेवटिया सतगुरू, भवसागर तर आयो।

'मीरा' के प्रभु गिरिधर नागर, हरख-हरख जस गायो॥

 पानी में मीन प्यासी।

मोहे सुन सुन आवत हांसी॥

आत्मज्ञानबिन नर भटकत है।

कहां मथुरा काशी॥१॥

भवसागर सब हार भरा है।

धुंडत फिरत उदासी॥२॥

मीरा कहे प्रभु गिरिधर नागर।

सहज मिळे अविनशी॥३॥

Thursday, July 20, 2023

और कलाली मिली सगली। राजा मानसिंह जी की वाणी। Bhajan, vocal Aviraj

दिला दो भीख दर्शन की । lyrics कल्याण जी। भजन। vocal Aviraj

घूंघट के पट खोल रे ! । राग दरबारी। कबीर भजन। vocal Aviraj

सदगुरू मिलता जाजो जी। मीरा भजन। vocal Aviraj

लटको छोड़ दे रे जोगिया । Never before, lyrics Kabir vocal Aviraj। New wa...

झूँठा ने झूँठ सुहावे। Lyrics कल्याण भारती जी की वाणी। vocal Aviraj

फकीरी नहीं कायर को काम। Lyrics मोहनपुरी जी। vocal Aviraj।

मैं हूं पुरुष पुराना साधो भाई। परावणी।lyrics मांगूराम जी की वाणी। vocal ...

परखो हाट हमारी । गिरधर साहिब की वाणी । परवाणी । vocal Aviraj

शरणे आपकी की आया गुरां सा । रोयल साहिब की वाणी। मध्यमा भजन। गुरु महिमा भ...