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Tuesday, August 29, 2023

 पानी में मीन प्यासी।

मोहे सुन सुन आवत हांसी॥

आत्मज्ञानबिन नर भटकत है।

कहां मथुरा काशी॥१॥

भवसागर सब हार भरा है।

धुंडत फिरत उदासी॥२॥

मीरा कहे प्रभु गिरिधर नागर।

सहज मिळे अविनशी॥३॥